ⓘ महाभारत

कुरुक्षेत्र युद्ध

कुरुक्षेत्र युद्ध कौरवसभ आ पाण्डवसभक मध्य कुरु साम्राज्य के सिंहासनक प्राप्ति के लेल लडल गेल छल। महाभारत के अनुसार ई युद्धमे भारतक प्रायः सभ जनपदसभ भाग लेनए छल। महाभारत आ अन्य वैदिक साहित्यसभ के अनुसार ई प्राचीन भारत मे वैदिक काल के इतिहासक सभसँ बडका युद्ध छल। ई युद्धमे लाखो क्षत्रिय योद्धा मारल गेल जेकर परिणामस्वरूप वैदिक संस्कृति तथा सभ्यताक पतन भऽ गेल छल। ई युद्धमे सम्पूर्ण भारतवर्ष के राजासभक अतिरिक्त बहुतसँ अन्य देशसभक क्षत्रिय वीरसभ सेहो भाग लेनए छल आ सभ गोटेक वीर गति प्राप्त भऽ गेल। ई युद्ध के परिणामस्वरुप भारतमे ज्ञान आ विज्ञान दुनु के साथ-साथ वीर क्षत्रीसभक अभाव भऽ गेल। एक प्रकारस ...

इन्द्रप्रस्थ

इन्द्रप्रस्थ प्राचीन भारतक राज्यसभ मध्ये एक छल । महान भारतीय महाकाव्य महाभारतक अनुसार ई पाण्डवसभक राजधानी छल । ई सहर यमुना नदीक किनारामे अवस्थित छल, जे कि भारतक वर्तमान राजधानी दिल्लीमे स्थित अछि।

साहित्य

कोनो भाषाक वाचिक आ लिखित कें साहित्य कहल जाए सकैत अछि । दुनियामे सभ सँ पुरान वाचिक साहित्य अपनासभकें आदिवासी भाषासभमे भेटैत अछि । ई दृष्टि सँ आदिवासी साहित्य सम्पूर्ण साहित्यक मूल स्रोत छी ।

मयासुर

मय या मयासुर, कश्यप आ दुनक पुत्र, नमुचिक भाई, एक प्रसिद्ध दानव। ओ ज्योतिष तथा वास्तुशास्त्रक आचार्य छल। मय दैत्यराज वृषपर्वन् के यज्ञ के अवसर पर बिन्दुसरोवर के निकट एक विलक्षण सभागृहक निर्माण करि अपन अद्भुत शिल्पशास्त्र के ज्ञानक परिचय देने छल। हिनकर दुईटा पत्नीसभ - हेमा आ रम्भा छल जाहिसँ पाँच पुत्र तथा तीन कन्यासभ भेल। जखन शंकर त्रिपुरक भस्म करि असुरसभक नाश करि देलक तखन मयासुर अमृतकुण्ड बनाके सभके जीवित करि देने छल मुद्दा विष्णु ओकर ई प्रयासके विफल करि देलक। ब्रह्मपुराण १२४ के अनुसार इन्द्र द्वारा नमुचिक वध होए पर ओ इन्द्रके पराजित करै के लेल तपस्या द्वारा अनेक माया विद्यासभ प्राप्त करि ल ...

जनमेजय

जनमेजय हिन्दू धर्म ग्रन्थ महाभारतक अनुसार कुरुवंशक राजा छल । महाभारत युद्धमे अर्जुनपुत्र अभिमन्यु जाहि समय मारल गेल, ओकर पत्नी उत्तरा गर्भवती छल । ओकर गर्भसँ राजा परीक्षितक जन्म भेल जे महाभारत युद्धक बाद हस्तिनापुर क गद्दी पर बैठल । जनमेजय याह परीक्षित तथा मद्रावतीक पुत्र छल । महाभारतक अनुसार मद्रावती हुनकर जननी छल, मुदा भगवत् पुराणक अनुसार, हुनकर माता ईरावती छल, जे की उत्तरक पुत्री छल ।

विराट

विराट हिन्दू ग्रन्थ महाभारत, एक राजा छल जतैक पाण्डव अपन अज्ञातवासक समयमे किछ वर्ष व्यतित करनए छल । विराट रानी सुदेष्नासँ विवाह केनए छल आ राजकुमार उत्तर आ राजकुमारी उत्तराक पिता छल । उत्तरा जे बादमे अर्जुनक पुत्र अभिमन्युसँ विवाह केनए छल । उत्तरा आ अभिमन्युक पुत्र परिक्षित महाभारतक युद्धक बाद हस्तिनापुरक राजा भेछल ।

                                     

ⓘ महाभारत

महाभारत हिन्दुसभक एक प्रमुख काव्य ग्रन्थ छी, जे स्मृति वर्गमे आबैत अछि । कहियो कहियो मात्र भारत कहल जाइवाला ई काव्यग्रन्थ भारतक अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक आ दार्शनिक ग्रन्थ छी । विश्वक सबसँ लम्बा ई साहित्यिक ग्रन्थ आ महाकाव्य, हिन्दू धर्मक मुख्यतम ग्रन्थसभमे सँ एक छी । ई ग्रन्थके हिन्दू धर्ममे पञ्चम वेद मानल जाइत अछि । यद्यपि एकरा साहित्यक सबसँ अनुपम कृतिसभमे सँ एक मानल जाइत अछि, मुदा आइयो ई ग्रन्थ प्रत्येक हिन्दू धर्मावलम्बीक लेल एक अनुकरणीय स्रोत छी । ई कृति प्राचीन भारतक इतिहासक एक गाथा छी । एहिमे हिन्दू धर्मक पवित्रतम ग्रन्थ भगवद्गीता सन्निहित अछि । सम्पूर्ण महाभारतमे लगभग १,१०,००० श्लोक अछि, जे युनानी काव्यसभ इलियड आ ओडिसीसँ परिमाणमे दस गुणा अधिक अछि ।

हिन्दू मान्यतासभ, पौराणिक सन्दर्भसभ आ स्वयं महाभारतक अनुसार ई काव्यक रचनाकार वेदव्यास जी के मानल जाइत अछि । ई काव्यक रचयिता वेदव्यास जी अपन ई अनुपम काव्यमे वेदसभ, वेदाङ्गसभ आ उपनिषदसभके गुह्यतम रहस्यसभक निरुपण केनए अछि । एकर अतिरिक्त ई काव्यमे न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, ज्योतिष, युद्धनीति, योगशास्त्र, अर्थशास्त्र, वास्तुशास्त्र, शिल्पशास्त्र, कामशास्त्र, खगोलविद्या तथा धर्मशास्त्रक सेहो विस्तारसँ वर्णन कएल गेल अछि ।

                                     

1. परिचय

आरम्भ

महाभारत ग्रन्थक आरम्भ निम्न श्लोकक साथ होइत अछि: मुदा महाभारतके आदिपर्वमे देल वर्णनक अनुसार कयन विद्वान ई ग्रन्थक आरम्भ नारायणं नमस्कृत्य सँ, तँ कियो आस्तिक पर्वसँ आ दोसर विद्वान ब्राह्मण उपचिर वसुक कथासँ एकर आरम्भ मानैत अछि ।
                                     
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उपेन्द्र नाथ झा व्यास

उपेन्द्र नाथ झा व्यास 1917-2002 जन्म स्थान-हरिपुर वकशीटोल, मधुबनी, बिहार । १९६९- उपेन्द्रनाथ झा" व्यास” दू पत्र, उपन्यास लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साहित्य अकादेमीक अनुवाद पुरस्कार प्राप्त । प्रकाशित कृति: कुमार, दू पत्र उपन्यास, विडंबना, भजना भजले कथा-संग्रह, पतन संन्यासी, प्रतीक काव्य, महाभारत पहिल दू पर्व आदि।

                                     

हनुमान मन्दिर, कन्नाट प्लेस

हनुमान मन्दिर नयाँ दिल्लीक हृदय कन्नाट प्लेसमे महाभारत कालीन श्री हनुमानजीएक प्राचीन मन्दिर छी । बालचन्द्र अन्कित शिखरवाला ई मन्दिर आस्थाक महान केन्द्र छी ।